यह मुक्ताकाश है। एक नैसर्गिक आंदोलन है। अपने ही भीतर श्रेष्ठता की तलाश का अनंत अनवरत् सिलसिला है। अभाव, दबाव और प्रभाव से सत्ताओं, व्यवस्थाओं, समाजों और सभ्यताओं को बदलने के दिन अब लद रहे हैं। बाह्य क्रांतियों और आंदोलनों का दौर अब चुक रहा है। अब भीतर के बदलाव की बारी है। अपने ही [...]