Antar-Drishti : अंतर्दृष्टि
चर्मचक्षु अधूरे हैं। भीतर की ओर उन्मुख होने की आवश्यकता है। भीतर की आंखें खोलकर अपने भीतर व्याप्त ब्रह्मांड को, विराट को देखने, जानने की चेष्टा का यह न्यौता है। यह आध्यात्मिकता को समर्पित आयाम है। मत, मान्यताओं और विश्वासों की युगानुकूल व्याख्या और पड़ताल के साथसाथ अंतर्यात्रा की तैयारी का प्रयत्न भी यहां होता है। समूहसंवाद, अंतर्यात्रा शिविर इत्यादि इस आयाम की सहज गतिविधियां है।
संयोजक : डॉ. सरिता शर्मा
ज्योति शर्मा, प्रवक्ता, शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
